RBI ने दी अच्छी खबर, अब UPI यूजर्स कर सकेंगे 1 लाख रुपये तक का लेनदेन
Meri Kahania

RBI ने दी अच्छी खबर, अब UPI यूजर्स कर सकेंगे 1 लाख रुपये तक का लेनदेन

RBI News: देश की सबसे बड़ी बैंक आरबीआई के द्वारा हेल्थ केयर और एजुकेशन के लिए यूपीआई का इस्तेमाल करने वालों के लिए काफी बड़ी खबर सुना दी है।
 
RBI ने दी अच्छी खबर, अब UPI यूजर्स कर सकेंगे 1 लाख रुपये तक का लेनदेन

Meri Kahania, New Delhi: आरबीआई के द्वारा यूपीआई की पेमेंट लिमिट को बढ़ा दिया गया है। हेल्थ केयर और एजुकेशन पेमेंट के लिए यूपीआई लिमिट को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 रुपये तक कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ से कुछ दूसरे ट्रांजेक्शन के लिए अभी लिमिट को 1 लाख ही रखा गया है।

आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने हाल ही में बैंठक में यूपीआई की लिमिट को बढ़ाने का ऐलान किया है। आरबीआई ने म्यूचुअल फंड के सब्सक्रिप्शन, बीमा प्रीमियम सब्सक्रिप्शन और क्रडिट कार्ड के लिए ऑनलाइन लेनदेन के लिए लिमिट को 15,000 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन से बढ़ाकर 1 लाख रुपये प्रति का लेनदेन किया है।

आरबीआई लेनदेन करने का भी प्रस्ताव दिया है। आरबीआई का कहना है कि इससे लोग और भी ज्यादा यूपीआई का इस्तेमाल करेंगे।

कैसे काम करता है UPI

UPI देश में एक वास्तविक टाइम पेमेंट सिस्टम है, जो कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल करके किसी भी बैंक से दूसरे बैंक में तत्काल लेन-देन की परमीशन देता है। एनपीसीआई के द्वारा इसको पेश किया गया है और इसने लोगों के पैसों के लेन-देन के तरीके को भी बदल दिया है।

आप रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर से किसी भी यूपीआई ऐप की सहायता से आईडी बना सकते हैं। एक बार जब यूपीआई बन जाती है तो आप आसानी से पेमेंट भी कर सकते हैं।

किसी भी समय कर सकते हैं यूपीआई पेमेंट

अगर आप यूपीआई आईडी बना लेते हैं तो किसी भी क्यूआर कोड मोबाइल नंबर, बैंक नंबर और यूपीआई पेमेंट कर सकते हैं। UPI एक शानदार सुविधा देता है और पीयर टू पीयर पेमेंट, बिल का पेमेंट और ऑनलाइन शॉपिग सहित दिन और रात कभी भी पेमेंट कर सकते हैं। UPI के आने से पेमेंट की सुविधा भी आान हो गई है।

रेपो रेट में नहीं हुआ है कोई बदलाव

बैंक के द्वारा इस समय रेपो रेट में बदलाव को लेकर कोई भी फैसला नहीं लिया गया है। वहीं गवर्नर ने महंगाई को काबू पाने के लिए रेपो रेट को 6.5 फीसदी पर रखा है। आरबीआई ने इस फाइनेंशियल ईयर जीडीपी का अनुमान बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया है। जो कि पहले 6.5 फीसदी था।

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