Success Story: संघर्ष की अनोखी कहानी! अचानक बन गए एसडीएम, जाने ...
Meri Kahania

Success Story: संघर्ष की अनोखी कहानी! अचानक बन गए एसडीएम, जाने ...

कभी-कभी जिंदगी बहुत कठिन लगती है, ऐसा लगता है मानो जिंदगी में करने को कुछ बचा ही नहीं है। ऐसा लगता है कि असफलता, निराशा, दुःख और दर्द ये सब भगवान ने मेरे लिए तय किये हैं। लेकिन हमारे हिसाब से ऐसा सोचना बिल्कुल गलत है.
 
संघर्ष की अनोखी कहानी! अचानक बन गए एसडीएम, जाने ...

Meri Kahania, New Delhi: जिंदगी की जद्दोजहद का दूसरा नाम हार है या फिर हारने का डर आपको और भी मजबूत बना देता है। हम बचपन से सुनते आए हैं, "कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती"।

इस कथन को सत्य कर दिखाया है ग्राम इब्राहिमाबाद निवासी श्याम बाबू जी ने। जीवन में कई बार हमारे सामने ऐसी परिस्थितियां आती हैं जब हमें समझ नहीं आता कि क्या करें और क्या न करें। लेकिन, ऐसे समय में खुद पर भरोसा रखना बहुत जरूरी है।

आज के समय में देश में बेरोजगारी के चलते सरकारी नौकरी अपने आप में किसी मेडल से कम नहीं है। बहुत से लोग सरकारी नौकरी करने का सपना देखते हैं, लेकिन सरकारी नौकरी पाना इतना आसान नहीं होता है।

रेलवे ग्रुप डी और एनटीपीसी के लिए 2 करोड़ से ज्यादा लोगों ने आवेदन किया था. हम आपको जिस शख्स से मिलवाने जा रहे हैं, उन्होंने पुलिस की नौकरी करने के बाद भी अपनी तैयारी जारी रखी,

क्योंकि उन्हें खुद पर भरोसा था कि उनकी मेहनत एक न एक दिन जरूर रंग लाएगी। आख़िरकार 14 साल बाद कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने अपना मुकाम हासिल कर लिया।

श्याम बाबू बलिया के एक छोटे से गांव इब्राहिमाबाद के रहने वाले हैं। श्याम बाबू की उम्र 36 साल है. उनकी पारिवारिक स्थिति अनुकूल नहीं थी. आर्थिक स्थिति ख़राब होने के कारण उन्हें अपने जीवन में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

इतना ही नहीं, आर्थिक तंगी के कारण बहनें शिक्षा भी नहीं पा सकीं। श्यामबाबू ने दसवीं कक्षा से ही सरकारी नौकरी के लिए फॉर्म भरना शुरू कर दिया था, ताकि वह अपने परिवार को अच्छी जिंदगी दे सकें.

वो कहते हैं न कि देर-सबेर भले ही देर-सबेर मेहनत रंग लाती है. श्याम बाबू के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. उन्हें यूपी पुलिस में कांस्टेबल की नौकरी मिल गई. श्यामबाबू ने कांस्टेबल के पद पर रहते हुए अपनी निजी पढ़ाई जारी रखी। 2010 से ही उन पर यूपी पीसीएस परीक्षा पास करने का जुनून सवार था।

आपको बता दें कि श्याम बाबू ने 2016 की यूपी पीसीएस परीक्षा में 52वीं रैंक हासिल की थी, इस प्रतियोगी परीक्षा में उन्हें एसडीएम रैंक मिली थी. 12वीं पास को मिल गई पुलिस में कांस्टेबल की नौकरी.

14 साल तक पुलिस में नौकरी करने के बाद जब डिप्टी एसपी ने श्यामबाबू को चाय के लिए भेजा तो उनके फोन पर एक मैसेज आया जिसमें लिखा था कि उन्होंने पीसीएस फाइनल मेरिट में अपनी जगह बना ली है.

श्यामबाबू ने जब डीएसपी साहब को चाय देने के साथ ही यह खुशखबरी सुनाई तो डीएसपी साहब ने उठकर श्यामबाबू को सलाम किया। श्यामबाबू को चाय भी पिलाई। आपको बता दें कि पुलिस में नौकरी करते हुए उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन पूरी की थी. 6 कोशिशों के बाद आखिरकार श्यामबाबू एसडीएम बन गए।

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