UP Chakbandi: यूपी में चकबंदी को लेकर खत्म होगी 100 साल पुरानी समस्या, किसानों अब मिलेगा ये फायदा
Meri Kahania

 UP Chakbandi: यूपी में चकबंदी को लेकर खत्म होगी 100 साल पुरानी समस्या, किसानों अब मिलेगा ये फायदा  

 UP News : मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में चकबंदी को लेकर 100 साल पुरानी समस्या अब खत्म होने वाली है जिससे किसानों को आसानी में पट्टे मिलेंगे चलिए जानते हैं खबर को विस्तार से...
 
यूपी में चकबंदी को लेकर खत्म होगी 100 साल पुरानी समस्या
Meri Kahania, New Delhi : सिंहपुर की टिकरी और बहादुरपुर की भदैया महमूदपुर ग्राम पंचायत की प्रथम चक्र की चकबंदी कराने का गजट अपर मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश सरकार सुधीर गर्ग द्वारा जारी कर दिया गया है।

प्रथम चक्र की चकबंदी न होने के चलते टिकरी और भदैया महमूदपुर के राजस्व अभिलेख (नक्शा व बंदोबस्त) उर्दू में हैं, जो किसानों के लिए भारी समस्या बने हुए हैं।

राजस्व लेखपाल व निरीक्षक से लेकर तहसील के उच्चाधिकारी भी इन अभिलेखों को नहीं पढ़ पा रहे हैं। ऐसे में इन गांवों के पांच हजार से अधिक किसानों के लिए यह समस्या बड़ा सिरदर्द साबित हो रही है।

उर्दू के शब्द नहीं आते थे समझ

तिलोई के टिकरी, कुकहा रामपुर और भदैया महमूदपुर गांवों की जमीदारी विनाश अधिनियम लागू होने से आज तक कभी भी चकबंदी नहीं हुई,

जिसके चलते लगभग सौ वर्ष पुराने अभिलेख जो उर्दू में है प्रयोग में लिए जा रहे हैं। खास बात यह है कि खतौनी तो जैसे तैसे उर्दू से हिंदी में अनुवादित हो गई।

लेकिन, बंदोबस्ती नक्शा व बंदोबस्त आज भी उर्दू में है। जिसके चलते सैकड़ो की संख्या में किसान अपने खेतों पर काबिज ही नहीं हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं, जिनकी जमीनें मतरुक खाते में बंधी हुई हैं।

यदि किसी को पट्टा मिला है और पट्टेदार नाप कराने के लिए जाता है तो राजस्व लेखपाल उर्दू की जानकारी न होने का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेते है। कोई किसान अपनी जमीन की हद बरारी कराना चाहता है तो राजस्व निरीक्षक और लेखपाल टरका देते हैं या गलत माप कर विवाद करवा देते हैं।

हो चुका है गजट

उपजिलाधिकारी तिलोई दिग्विजय कुमार सिंह ने बताया कि टिकरी और भदैया महमूदपुर की चकबंदी का गजट हो चुका है। शीघ्र ही चकबंदी प्रक्रिया के लिए अभिलेख चकबंदी विभाग को हस्तगत किए जाएंगे

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